Mahakumbh mela 2025 sahi snan (कुम्भ मेला क्यों लगता है)

Kumbh Mela में शाही स्नान करने से पाप मिट जाता है।ऐसा ऋषि-मुनियों का कहना है। क्योंकि भगवान जब अमृत लेकर जा रहे थे, तब अमृत का कुछ बूंदे गिर गया था। इसीलिए जहां-जहां पर अमृत गिरा था, वहां-वहां पर कुंभ मेला लगता है। 


कुंभ समारोह (पर्व) सनातन धर्म का सबसे बड़ा समारोह है। इस मेला में सम्मिलित होने वाला जितने भी धर्म रक्षक होते हैं, सब के सब प्रयागराज में जाकर गंगा शाही स्नान करते हैं। 


उन सभी श्रद्धालुओं को मानना है कि धर्म की रक्षा करने में जितने भी हमारे द्वारा पाप हुए हैं। उन सभी पापों को मिटाने के लिए हमलोग कुंभ मेला में जाकर गंगा शाही स्नान करके अपने पापों को गंगा में धूल लेते हैं। जिसे हमारा मन-तन फिर से शुद्ध एवं पापमुक्त हो जाता है। और हम फिर से सनातन धर्म की रक्षा में लग जाते हैं। 

Mahakumbh mela live 2025 sahi snan


सनातन धर्म की रक्षा विभिन्न तरीके से किया जाता है। 

कोई व्यक्ति सन्यासी बनाकर वेद-पाठ करके धर्म की रक्षा करते हैं, तो कोई व्यक्ति दान-पूर्ण करके तो कोई व्यक्ति जप-तप करके धर्म की रक्षा करते है।

सभी व्यक्ति का धर्म की रक्षा करने के लिए सभी का मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन सभी का आस्था सनातन धर्म के प्रति ही होते हैं। चाहे वह व्यक्ति अघोरी बनकर घोर तपस्या करके या फिर नागा साधु बनकर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए धर्म की रक्षा करें या फिर वेद पाठ करके वेद का अध्ययन करके नई तकनीक का खोज करें या फिर जादू-टोना का रिद्धि-सिद्धि प्राप्त करके करें। यह सभी सनातन धर्म की रक्षा करने का ही मार्ग हैं। इसीलिए इस कुंभ समारोह में सभी के सभी धर्म रक्षक एकत्रित होकर धर्म की रक्षा करने हेतु विचार विमर्श करते हैं। और गंगा शाही स्नान करने के बाद फिर से वह सभी के सभी लोग अपने-अपने कार्य धर्म रक्षा करने के क्षेत्र में लग जाते हैं। जिसे हमारी सनातन धर्म की रक्षा होती है। धर्म की रक्षा करना हम सभी हिंदुओं के लिए सर्वोपरि हैं। इसीलिए हमें धर्म की रक्षा करनी चाहिए। 




कुंभ मेला लगने का एक और बड़ा रीजन यह भी होता है। जो इस प्रकार हैं, विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो कुंभ मेला 12 वर्षों पर लगना यह 100% सत्य है। 

क्योंकि बृहस्पति ग्रह सभी ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है और वह ग्रह अपनी एक चक्कर पूरा करने में 12 वर्षों का समय ले लेता है। इसीलिए सनातन धर्म के अनुसार यह खोज सबसे पहले कर लिया गया था, ऋषि मुनियों के द्वारा। इस खोज से यह निष्कर्ष निकलता है कि बृहस्पति ग्रह सभी ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ एवं बड़ा ग्रह है। और इसका गुरुत्वाकर्षण भी सबसे अधिक है। 

इसीलिए बृहस्पति ग्रह अपने आसपास के जितने भी क्षुद्र ग्रह होते हैं उन सभी ग्रहों को बृहस्पति ग्रह अपने ओर खींचकर रखे रहते हैं। क्योंकि उपग्रह पृथ्वी पर गिर ना सके।


अगर किसी कारणवश उपकरण या क्षुद्र ग्रह बृहस्पति ग्रह से छूटकर डायरेक्ट पृथ्वी पर गिर जाता है, तब पृथ्वी पर इसका काफी गहरा असर पड़ता है। जिसके कारण पृथ्वी पर रहने वाले पृथ्वी वासी को काफी बड़ा नुकसान हो सकता है।


इसीलिए सनातन धर्म के अनुसार कुंभ मेला हर 12 वर्षों में लगता है। क्योंकि बृहस्पति ग्रह 12 साल में अपनी एक चक्कर पूरा कर लेता है। 

कुंभ मेला में शाही स्नान करने के बाद जितने भी धर्म रक्षक लोग होते हैं। वह फिर से बृहस्पति ग्रह के आराधना में लग जाते हैं। उनसे सभी साधु संत अपने जप तक में यही प्रार्थना करते हैं कि हे बृहस्पति ग्रह आप हमारे पृथ्वी वासी को हमेशा इसी प्रकार रक्षा करते रहे। हम लोग सदा आपका आभारी रहूंगा। 


Modern युग में कुंभ मेला पर वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया तो यह 100% सत्य पाया गया है। क्योंकि खगोल विज्ञान के अनुसार बृहस्पति ग्रह वास्तव में 12 वर्षों में अपना एक चक्कर पूरा करता है। और वह अपने गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सभी क्षुद्र ग्रहों को अपनी ओर आकर्षित किए हुए हैं। इसीलिए इस कुंभ समारोह में श्रद्धालुओं को सुरक्षा देने के लिए सरकार उत्तरदायित्व उठाता है। और इस कार्यक्रम पर सरकार विशेष ध्यान देता है।

कुंभ मेला में लोग गंगा sahi snan क्यों करने जाते है।

कुंभ मेला में अक्सर काफी भीड़ देखने को मिलता है। यहां पर श्रद्धालुओं को काफी बड़ी संख्या में एकत्रित होते हुए देखने को मिलता है। जितने भी श्रद्धालु होते हैं जो सनातन धर्म के प्रति अपना आस्था रखता है, उन सभी श्रद्धालुओं के लिए आयोजित किए गए कुंभ मेला में जाने का इच्छा सभी को होती हैं। 
क्योंकि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले उन सभी श्रद्धालुओं को मानना है कि जब भगवान अमृत लेकर जा रहे थे, तब जहां-जहां अमृत गिर गया था। तब से वहां वहां पर कुंभ मेला लगता है, और कहा जाता है कि वहां गंगा स्नान करने से मन शुद्ध हो जाता है। और कहा जाता है कि हमारे द्वारा किया गया पाप मिट जाता है। इसीलिए वहां लोग गंगा साही स्नान करने जाते हैं।
भारत में चार जगहों पर कुंभ मेला लगता है। उत्तराखंड का हरिद्वार, यूपी का इलाहाबाद या प्रयाग, मध्य प्रदेश का उज्जैन, महाराष्ट्र का नासिक यह सभी जगह पर 12 वर्षों पर कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है। 
क्योंकि सनातन धर्म के अनुसार यह मान्यता है कि पूरे संसार में जितने भी साधु-संत, सन्यासी, रिद्धि-सिद्धि,तांत्रिक एवं भगत-भगतिनी, बनिया ओझा होते है। या कोई भी सभ्य व्यक्ति होते हैं। जो पापा-पुण्य का फर्क समझते हैं। वैसे लोग इस महाकुंभ में सम्मिलित होकर गंगा स्नान करते हैं। और अपना जप-तप, दान-दक्षिणा देते है और लेते है। जिसे उनके द्वारा किया गया पाप मिट सके । इसीलिए इस महाकुंभ में श्रद्धालु सब आते है और गंगा स्नान करके अपना पाप धूल लेते हैं।
और वह पुण्य की ओर आगे बढ़ जाते है। जिसे उन्हें मृत्यु के पश्चात स्वर्ग की प्राप्ति हो सके । इसी भाव से सभी श्रद्धालु यहां पर आते है। जिसके कारण काफी बड़ी संख्या में भीड़ लगती है। जिसे ही महाकुंभ कहा जाता है। जो 144 वर्ष पर लगती है।
ऐसे तो कुंभ मेला 12 वर्ष पर ही लगता है और अर्ध कुंभ मेला 6 साल पर लेकिन वहीं अगर 144 वर्ष जब बीत जाते है। तब एक या दो पीढ़ी बीत जाती है। अर्थात एक सातवीं बीत जाती है। इसीलिए इस कुंभ मेला का नाम महाकुंभ रखा जाता है । जिसके कारण श्रद्धालुओं एवं सनातन धर्म में आस्था रखने। वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है जिसे ही महाकुंभ कहा जाता है।
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