धर्म और गुलामी एक साथ नहीं चल सकती है। यह कथन बाबा साहेब Dr भीम राव अम्बेडकर जी ने कहा था। क्योंकि महाड़ सत्याग्रह के समय वहां के स्वर्णों ने अछूतों को बहिष्कृत घोषित क्या था।
इसीलिए बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने उस समय कहा था कि धर्म और गुलामी एक साथ नहीं चल सकती है।
गैर ब्राह्मण आंदोलन के नेता श्रीमान सावरकर के तरफ से एक telegrams आया था। उस पत्र में उन्होंने लिखा था कि हम महाराष्ट्र के गैर ब्राह्मण नेता यह घोषणा करते हैं की हम आपकी सत्याग्रह को तन मन से सहयोग देंगे। लेकिन एक शर्त है की कोई भी ब्राह्मण इस आंदोलन में शामिल नहीं होगा।
तब बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने उस telegrams के प्रति, उस समय उपस्थित उन सभी समर्थकों के बीच कहां था कि ये मान लेना गलत है की सभी ब्राह्मण अछूतों का दुश्मन है। निजी तौर पर मुझे ब्राह्मणों से घिरना नही है।
मुझे घिरना है ब्राह्मण बाद की भावना से, जो की ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों दोनो में हो सकती है।
तब यह तैया हो गया की 25-26 दिसंबर 1927 को इन दिनों महाड़ में सत्याग्रह होगा।
उसी सत्याग्रह के समय बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि धर्म और गुलामी एक साथ नहीं चल सकती है।
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