उपमा अलंकार किसे कहते है (पहचानने की सबसे अच्छा ट्रिक)

 उपमा अलंकार : वैसे वाक्य को कहा जाता है जहां पर , जब किसी व्यक्ति या वस्तु के रंग, रूप, आकार, भाव, गुण, दोष, दसा स्थिति आदि की तुलना या सामान्ता किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के साथ की जाती है । तो वहां पर उपमा अलंकार होता है। 

उपमा अलंकार किसे कहते है (पहचानने की सबसे अच्छा ट्रिक)


जैसे: 1. फूलों सा चेहरा तेरा, कलियों सी मुस्कान है।

2. सागर सा गंभीर हृदय हो, गिरी सा ऊंचा हो जिसका मन।

3. हरिपद कोमल कमल से।

4. उसका मुख्य चंद्रमा के समान सुंदर हैं।

5. कल्पना सी अति कोमल।

6. उतर रही है संध्या सुंदर परी सी।

7. चंद्रमा सा कांतिम्य, मृदु कमल सा कोमल महा। 

8. कुसुम सा हंसता हुआ, प्रणेश्वरी का मुख रहा।

9. मखमल के झूले पड़ा हाथी सा ढीला।

10. हाय फूल सी कोमल बच्ची हुई राख की ढेर।

11. कान सा रूप प्रताप दिनेश सा।

12. सोम सा शील है, राम महीप का।

13. निकल रही मर्म वेदना, करुणा विकल कहानी सी।

14. बहता समय शीला सा जम जाएगा।

15. वह दीपशिखा (कालिदास) सा शांत भाव में लीन।

16. कमल सा कोमल गात हुहान।

आइए अब हम जानते हैं उपमा अलंकार पहचानने की विधि के बारे में।

पहचान - पंक्ति में सा, सी, सो, सम, सरिस, जैसा, तुल्य आदि शब्दों का प्रयोग मिलता है। तब उपमा अलंकार होगा। 

उपमा अलंकार कैसे पहचानें

आइए अब हम जानते हैं उपमा अलंकार पहचानने की विधि के बारे में।
पहचान - पंक्ति में सा, सी, सो, सम, सरिस, जैसा, तुल्य आदि शब्दों का प्रयोग मिलता है। तब उपमा अलंकार होगा। 
जैसे:

 1. फूलों सा चेहरा तेरा, कलियों सी मुस्कान है।

2. सागर सा गंभीर हृदय हो, गिरी सा ऊंचा हो जिसका मन।

3. हरिपद कोमल कमल से

4. उसका मुख्य चंद्रमा के समान सुंदर हैं।

5. कल्पना सी अति कोमल।

6. उतर रही है संध्या सुंदर परी सी

7. चंद्रमा सा कांतिम्य, मृदु कमल सा कोमल महा। 

8. कुसुम सा हंसता हुआ, प्रणेश्वरी का मुख रहा।

इन सभी वाक्यों में कहीं न कहीं पर इसका पहचान चिन्ह जरूर देखने को मिल रहा है। इसीलिए यह वाक्य उपमा अलंकार कहलाता है।
गौर से देखेंगे तो प्रत्येक वाक्य में इसका पहचान चिन्ह जैसे- सा, सी, से, सम, सरिस, जैसा, तुल्य, आदि शब्दो का प्रयोग जरूर देखने को मिल रहा है। इसीलिए इस प्रकार के वाक्य को उपमा अलंकार कहा जाता है।

उपमा अलंकार के भेद

उपमा अलंकार के दो भेद होते है।
1. उपमेय
2. उपमान
यह दोनो किसी व्यक्ति या किसी वस्तु के नाम है।
जिसका मतलब होता है, एक दूसरे से तुलना करना।
जिसकी तुलना होती है उसे उपमेय कहते है। और जिससे तुलना होती है। उसे उपमान कहते है।

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